मिडिल ईस्ट की जंग में फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी की एंट्री, इजराइल और अमेरिका के साथ ईरान का संघर्ष तेज 


इज़राइल ने लेबनान में ईरान-समर्थित हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है, क्योंकि हिज़बुल्लाह ने मिसाइल और ड्रोन से जवाब दिया। इससे इलाके में संघर्ष और फैल रहा है। इज़राइल ने बेरूत और दक्षिण लेबनान में हिज़बुल्लाह के किलेबंद इलाकों को निशाना बनाया है, जिससे अरब देशों में भी चिंता बढ़ी है। बडी बात यह है कि मीडिल ईस्ट की जंग में अब फ्रांस की भी एंट्री हो गई है। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी इस युद्ध में आगे आए हैं। 


ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा है कि ब्रिटेन ने किसी भी अमेरिकी-इज़राइली हमले में हिस्सा नहीं लिया। लेकिन देश ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है ताकि क्षेत्रीय रक्षा-सुरक्षा और ब्रिटिश नागरिकों की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने यूएस को अपने मिलिट्री बेस (अड्डों) का उपयोग करने की इजाजत दी है ताकि ईरानी मिसाइलों को रोकने में मदद मिल सके। यह कदम रक्षात्मक कार्रवाई के तहत लिया गया है, न कि सीधे युद्ध में प्रवेश के रूप में। ब्रिटेन ने ईरान की मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इससे संकट और बढ़ सकता है, इसलिए संघर्ष बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीति जरूरी है।
फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और सरकार ने एक संयुक्त बयान में ईरान के हमलों की निंदा की है और कहा है कि इससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को खतरा है। फ्रांस ने ज़ोर देकर कहा है कि सभी पक्षों को तानाबाना बढ़ाने से बचना चाहिए और संघर्ष को राजनीतिक और कूटनीतिक रास्तों से ही हल किया जाना चाहिए।

जर्मन चांसलर फ्रीडरिक मेर्ज़ ने कहा है कि इस संकट के बाद “बाद के दिन” की योजना तैयार करने की जरूरत है — यानी जब लड़ाई खत्म हो, तब मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए क्या रोडमैप होना चाहिए। जर्मनी भी यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर कूटनीति और संयम पर ज़ोर दे रहा है, साथ ही आगे के संकट से बचने की रणनीति बनाना चाहता है।

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत और नेतृत्व परिवर्तन
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्ला अली ख़ामेनेई की हवाई हमले में मौत के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है। उनकी मौत के बाद ईरान में अस्थायी नेतृत्व परिषद का गठन हुआ है, लेकिन भविष्य अनिश्चित है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और तनाव
दुनिया भर में संघर्ष पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आई हैं — कुछ देश शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं। सऊदी अरब ने ईरान के दूत को तलब किया है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक तनाव में और वृद्धि हुई है।

संघर्ष का फैलाव और संभावित असर
इस बीच संघर्ष का असर खाड़ी देशों, तेल बाजार और शांतिपूर्ण कूटनीति पर भी पड़ा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चिंता बढ़ी है। कई जगह मिसाइलों और विस्फोटों की रिपोर्ट हैं, जिसमें ईरान की ओर से प्रतिशोध का संकेत मिलता है।