40 विला खरीदने के मामले में IAS अधिकारी पर उठे सवाल, गहलोत ने CM भजनलाल शर्मा को घेरा; शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी को भारत लौटकर आरोपों पर सफाई देने की दी सलाह
जयपुर। राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 कॉटेज और विला खरीद प्रकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने इस मामले में राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों CBI और ED से जांच कराने की मांग की है। गहलोत ने स्पष्ट कहा कि केवल अधिकारी को APO (Awaiting Posting Order) करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
30 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में जो तथ्य और आरोप सामने आ रहे हैं, उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल APO जैसी प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मामले की तह तक जाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
गहलोत ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने 40 विला की खरीद, उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) और मुख्यमंत्री के एक रिश्तेदार से जुड़े कथित पहलुओं का भी जिक्र किया। उन्होंने इन सभी बिंदुओं की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी तरह का संदेह दूर होना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने IAS शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों को जल्द भारत लौटकर अपने ऊपर लग रहे आरोपों के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए। गहलोत के मुताबिक, पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि एक मीडिया हाउस ने 27 अक्टूबर को खुलासा किया था कि IAS शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर ने एक ही कंपनी से पिछले ढाई साल में कुल 40 कॉटेज और विला खरीदे हैं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी।
शिखर अग्रवाल उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव होने के साथ दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण, रीको और निवेश संवर्धन ब्यूरो, राजस्थान के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत थे।
मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने देर रात कार्मिक विभाग के आदेश जारी कर उन्हें सभी संबंधित पदों से हटाकर APO कर दिया।
अब अशोक गहलोत की CBI और ED जांच की मांग के बाद यह मामला एक बार फिर राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इस प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपेगी या विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रहेगी।