ईरान का अमेरिका से वार्ता से इनकार, ‘दोनों को सबक सिखाने’ की चेतावनी


तेहरान/वॉशिंगटन

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख अली लारीजानी ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान वॉशिंगटन से वार्ता नहीं करेगा और अमेरिका तथा इज़रायल को “सबक सिखाने” के लिए तैयार है। लारीजानी का आरोप है कि अमेरिका ने युद्ध से पहले बातचीत का दिखावा करते हुए ईरान को भ्रमित किया और फिर अचानक सैन्य कार्रवाई की। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका पर भरोसा करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान “दबाव या दादागीरी के आगे झुकने वाला नहीं है” और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर स्तर पर जवाब देगा।

व्हाइट हाउस का दावा – ‘नया नेतृत्व बातचीत को तैयार’

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार (1 मार्च 2026) को दावा किया कि ईरान के “संभावित नए नेतृत्व” ने अमेरिका के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं। अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तेहरान में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बनी है और कुछ संकेत राजनयिक संवाद के पक्ष में मिले हैं।

हालांकि, अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया संभावित नेतृत्व कौन है और बातचीत की इच्छा किस माध्यम से जताई गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी The Atlantic को दिए साक्षात्कार में कहा कि वे “आखिरकार बातचीत के लिए तैयार” हैं, लेकिन फिलहाल सैन्य अभियान बिना रुकावट जारी रहेगा। उन्होंने कहा,

“वे बात करना चाहते हैं, और मैं बात करने के लिए सहमत हो गया हूं, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।”

ट्रम्प ने संभावित बातचीत के समय को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।


बी-2 बमवर्षकों से हमले

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर 2,000 पाउंड के बमों से हमला किया। यह रणनीति जून 2025 में अपनाई गई कार्रवाई के समान बताई जा रही है, जब ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में दावा किया था कि ईरान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा था जो अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती हैं। इसी तर्क को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ बमबारी “रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा” के तहत की जा रही है।


बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य

एक ओर ईरान बातचीत से इनकार कर कड़ा रुख दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका संभावित संवाद के संकेतों की बात कर रहा है। ऐसे में क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक कोशिशें साथ-साथ चलती नजर आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि हालात पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ते हैं या कूटनीतिक समाधान की दिशा में कोई नई पहल सामने आती है।