प्राइवेट टीचिंग इंस्टीट्यूट द्वारा टीचर्स को न्यूनतम सैलरी नहीं देने पर झुंझुनूं कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के आदेश


पे-स्लिप-पीएफ कटौती को लेकर होगी जांच, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को तत्काल जांच के आदेश दिए। 

झुंझुनूं। जिला कलेक्टर रामावतार मीणा ने निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को न्यूनतम वेतन न दिए जाने और लंबे समय से वेतन भुगतान न होने की शिकायतों को गंभीर मानते हुए सख्त एक्शन की तैयारी कर ली है। कलेक्टर ने इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और साफ कहा है कि दिन रात एक कर बच्चों के भविष्य का निर्माण करने में जुटे टीचर्स के न्यूनतम वेतन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले संस्थानों की संबद्धता निरस्त करने सहित नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। 

बता दें कि पिछले कई दिनों से जिला कलेक्टर रामावतार मीणा को विभिन्न निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों द्वारा न्यूनतम वेतन न दिए जाने और कई मामलों में तो महीनों से वेतन बकाया होने की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मीणा ने शिक्षा विभाग को इस अनियमितता पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर मीणा ने जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को निर्देश दिए हैं कि वे इन शिकायतों की गहनता से जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि निजी शिक्षण संस्थान श्रम कानूनों के तहत निर्धारित न्यूनतम वेतनमान का पालन कर रहे हैं या नहीं। साथ ही, शिक्षकों को नियमित रूप से वेतन भुगतान हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।

गौरतलब है कि निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को अक्सर कम वेतन और अनियमित वेतन भुगतान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। जिला कलेक्टर द्वारा लिया गया यह कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा और निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

जांच के दायरे में यह भी देखा जाएगा कि क्या संस्थान शिक्षकों को समय पर वेतन पर्ची (पे-स्लिप) उपलब्ध करा रहे हैं और क्या भविष्य निधि (पीएफ) और अन्य कटौतियों का सही ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है।

सरकार की साफ मंशा है कि टीचर्स का किसी भी सूरत में न्यूनतम वेतन सुनिश्चित हो ताकि वो पूरी जिम्मेदारी से अपनी सेवाएं प्रदान कर सकें वहीं अपना घर खर्च भी चला सकें। इसी कड़ी में कलेक्टर के यह आदेश काफी महत्वपूर्ण हैं। 

"पिछले लंबे समय से निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की ओर से अक्सर कम वेतन और अनियमित वेतन भुगतान जैसी शिकायतें मिल रही थी, जिससे उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए जांच के लिए कहा है और यदि कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसकी संबद्धता निरस्त करने के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।"
रामावतार मीणा, कलेक्टर, झुंझुनूं